Feb 24, 2024
प्रेम

तुम मेरी चाहत हो-२

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तुम मेरी चाहत हो-२


                       तुम मेरी चाहत हो - २
                   (एक खट्टी-मीठी , प्यार की कहानी)


                   ***** पूना स्टेशन ****

       पूना स्टेशन के बाहर की तरफ तो गाड़ियों की वजहसे ट्रैफिक ही ट्रैफिक लगा हुआ था। इतने सारे गाड़ियो के हॉर्न एकसाथ बजने से, उपरसे ट्रैन स्टेशन बाजू में होने के कारण वहाँपर मौजूद सारी भीड़ के कान मानो दुखने ही लगे थे।

   ट्रेन स्टेशन में शुभ्रा, वहाँपर आनेवाली किसी ट्रेन का इंतजार कर रही थी।  ट्रेन स्टेशन पर लगातार की जानेवाली annauncement की वजहसे अब शुभ्रा के दिल की धड़कने तेजी से बढ़ती जा रही थी। जितना भी कुछ सोचे जैसे भी कुछ सोचे मगर शुभ्रा के माथेपर पसीनो की बूंद भी कम ही नही हो रही थी।

   सिंपल सी साड़ी पहनकर खुद के चेहरे को जैसे तैसे ढककर वोह तो बस इस सारे ही शहर से ही नही बल्कि अपनी अतीत से,अपनी जिंदगी के पुराने जख्मो से दूर अब बहोत ही दूर जाना चाहती थी। एक ऐसी जगह जिसे कोई भी उसे जानता नही,कोई भी कभी भी उसे पहचानेगा भी नही।

      सामने से अब पुणे से जयपुर जाने वाली ट्रेन यानी भारत देश मे स्थित राजस्थान की ओर रवाना होने वाली ट्रेन स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर आकर रुक गयी। अब तो शुभ्रा के पास उतना समय भी नही बचा था की फिरसे अपनी लाइफ को रिवर्स करे औऱ चले अपनी मनमर्जी से।

    शुभ्रा ने अब अपनी हाथोंमें पकड़ी हुयी बस एक ही बैग थी। शुभ्रा ने उस बैग को पकड़कर, जयपुर जाने वाली ट्रेन की तरफ अब वोह तेजी से भागकर निकल गयी। शुभ्रा जानबूझकर ही जयपुर ट्रेन में जो आखिर के कुछ सेकंड क्लास के किसी एक डिब्बे में चढ़ गयी। शुभ्रा ने गाड़ी में चढकर सबसे पहले अपनी चारों ओर अपनी नजर घुमायी। जैसी तैसी खाली जगह की एक सीट देखकर वहाँपर बैठ गयी।  फिरसे आपने चारो ओर शुभ्रा ने अपनी नजर घुमायी।

   जयपुर ट्रैन में पैसेंजर की भी बहोत ही बड़ी भीड़भाड़ थी। साथ ही साथ उन पैसेंजर्स में से कोई अपनी फैमिली के पास, दोस्तोके पास, या फिर काम की वजहसे जयपुर जाना चाहता था। तो कोई फिरसे अपनी मिट्टी, गांव, अपनी फैमिली, बचपन, रिश्तदारों से मिलने जा रहा था।

    जानबूझकर ही सही अपने चेहरे को पल्लू को नीचे सरका कर शुभ्रा चली अपनी नयी जिंदगी की ओर, अपनी जिंदगी की मंजिल तलाशने।

फिर मिलेंगे...

                         तुम मेरी चाहत हो - ३
                   (एक खट्टी-मीठी , प्यार की कहानी)
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