Aug 18, 2022
सामाजिक

तू पूरे करना सपने मेरे

Read Later
तू पूरे करना सपने मेरे

सुहानी और उसकी माँ गंगा, रोज बैठकर बातें किया करते थे। गंगा, सुहानी से रोज एक ही बात बोला करती-" मेरे माँ बाप ने तो मुझे कुछ बनने नहीं दिया,पर मै तुझे पढ़ाकर इंजीनियर बनाऊगी, वह भी पूरे कॉलेज में टॉप करके।"सुहानी आगे से हाँ कह दिया करती।

पर सुहानी को गाना गाने मे बहुत रुचि थी।धीरे धीरे समय के साथ सुहानी स्कूल गई कालेज गई।पर जब भी वह अपने गाने के शौक को पूरा करना चाहतीं। तो गंगा डांट देती कहती-"पढ़ाई पर ध्यान दो,इस गाने में क्या रखा है।"


आखिरकार सुहानी इंजीनियर बन गई पर वह कॉलेज में टॉप नहीं कर पाई। परिणाम आने के अगले ही दिन खबर आई। सुहानी ने खुदकुशी कर ली और वह एक पत्र गंगा के लिए लिख कर छोड़ गई। जिसमें लिखा था -माँ मैं इंजीनियर तो बन गई, पर टॉप नहीं कर पाई ।ना तो मैं तुम्हारा सपना पूरा कर पाई और ना अपना ।जो मैं अपनी इच्छा से करना चाहती थी। इसलिए जा रही हूँ ।"

सुहानी का वह पत्र पढ़कर गंगा को एहसास हुआ, कि किसी भी माँ-बाप को बच्चे के ऊपर इतना दबाव नहीं डालना चाहिए किसी प्रतियोगिता में अव्वल आने का। गंगा ने यही गलती करी, पहले तो सुहानी की रुचि के विरुद्ध किसी और दिशा में धकेला। फिस अव्वल आने का दबाव उस पर डाला और सब कुछ खो दिया। आजकल अधिकतर लोगों में प्रतियोगिता में भाग लेने की बजाएं अव्वल आने की होड़ ज्यादा है।

-नीति अनेजा पसरीचा 

ईरा वाचनाचा आनंद घ्या आता app मधून, आजच download करा. Download App Now