Feb 24, 2024
प्रेम

मेरे वेलेंटाईन मेरे पापा

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मेरे वेलेंटाईन मेरे पापा
?"मेरे वैलेंटाइन मेरे पापा"?

स्कूल बस के इन्तजार में खड़े खड़े मनाली को बीस मिनट हो गए; पता नहीं आज बस लेट क्यों हो गयी है? छुट्टी तो एक बजे हो जाती है?

पास खड़ी एक महिला ने पूछा - \"बेटी , ---जरा फोन लगा कर पता करो न , बस क्यों नही आई?\"
\"मैंने फोन कर पता किया है आन्टीजी, बस पांच-दस मिनट में आती ही होगी।
मेरा नाम मनाली है।हम लोग इसी नॉर्थ अपार्टमेंट में रहते हैं।आप किसे लेने आती हैं ?\" मैनें उनसे पूछ लिया।
उन्होंने कहा - \"मैं तन्मय को लेने आती हूं।मेरा नाम छाया है। सुबह उसकी मम्मी आफिस जाते समय छोड़ देती है।\"
\"अच्छा अच्छा, तन्मय सोनू के साथ ही है उसी क्लास में ? उसके मुँह से कई बार तन्मय का नाम सुना है। आप दादी हैं न उसकी?\"
\"नही नही , मैं उसकी नानी हूं। हम उधर साउथ अपार्टमेंट में रहते हैं।\"
तभी बस आ गयी और हम दोनों अपने अपने बच्चो को लेकर घरों की ओर चल दीं....।

दो दिन से सोनू को बुखार था , जब तक बुखार तेज था चुपचाप सोया रहा, सचिन (मेरे पती),डॉक्टर को दिखा दवाई ले आये,।
आज बुखार उतर गया तो उसकी शरारतें शुरू हो गईं । बिस्तर में लेटने का नाम नही,
दोपहर में मैने उसे धमकाते हुए कहा-" देख सोनू,अगर तू आराम नही करेगा, तो कल से स्कूल भेज दूंगी।\" तब जा कर वह चुपचाप बैठा ही था की दरवाजे की बेल बजी। देखा तो तन्मय और छायाजी , दोनों दरवाजे पर खड़े दिखे।
\"अरे आन्टी आप !! आइये आइये।\" मैं उन्हें अंदर ले आयी और ड्राइंगरूम में उन्हें बिठाया।
\"यह सोनू दो दिन से स्कूल नहीं आया, तो तनु उससे मिलने की जिद करने लगा , तो सोचा देख आऊं।\" छाया आन्टी बोलीं।
तनु को देख सोनू की मस्ती फिर शुरू हो गयी।आंटी को पानी दे कर मैं उनसे बातें करने लगी।
उन्होंने बताया तनु और उसकी माँ सुरभि (उनकी बेटी) उन्ही के साथ रहती है। मैंने पूछा -\"तो तनु के पापा .... क्या वे कहीं बाहर रहते हैं ?\"
\"नही बेटी वो ........ नही ....\" ,
\"ओह्ह ..... , तो क्या वे इस दुनिया में.....?\"
अं ..... ऐसा ही समझो।\"
फिर मैंने ज्यादा पूछना उचित नही समझा, पर आंटी जी खुद ही बताने लगीं,
\"क्या बताऊं,... मेरी बेटी तो प्यार में धोखा खा बैठी।बड़े घर का सुन्दर लड़का होस्टल में रहता था। उसी की बातों में आ कर बिना कुछ जाने समझे शादी कर ली। एक डेढ़ साल बाद उसके रंग ढंग समझ मे आने लगे। वो तो पहले से ही शादी शुदा था। जब जायदाद की बात आई तो इसे यहीं छोड़ कर उड़नछू हो गया---- मेरी बेटी तो ठगी गयी। मैं मां ठहरी , अकेली थी, मन पर पत्थर रख, अपनी बेटी को माफ कर यहां ले आयी।
अब बेटी नौकरी करती है। विधवा सा जीवन जी रही है,....\"
\"तो आपने पुलिस की मदद ...\"
\"अरे बेटी, मंदिर में ,की शादी का क्या कोई प्रमाण रहता है ? पुजारी जिसने शादी रचाई थी, उसका मुंह भी शायद पैसे ने बन्द कर दिया था।
सब किस्मत की बात है। तुमसे बात कर ली दिल हल्का हो गया अब चलूं।\"
तनु के हाथ मे चाकलेट दे कर मैंने उनसे बिदा ली---।
दो दिन बाद सोनू की स्कूल यथावत शुरू हो गई। सुबह ये उसे स्कूटर से स्टैंन्ड तक छोड़ देते ; दोपहर मे मैं उसे लेने जाती तब छाया आंटी से वहीं मुलाकात हो जाती थी।

एक शाम सचिन (मेरे पति) ने बताया सुमन , - उनके छोटे भाई का फोन आया है।वह दस पंद्रह दिन की छुट्टी ले कर जर्मनी से आ रहा हैं।
मेरा लाडला देवर,सोनू के प्यारे चाचा आ रहे हैं, हम दोनों खुश हो गए । तभी इन्होंने मुझे समझाते हुए कहा, देखो मीनू, दो साल बाद सुमन आ रहा है , आते ही वहीं "शादी करो , लडकी पसंद वाली जिद मत शुरू कर देना" ,पता नही पुरानी बातें अभी भूला है या नही।
ये बोल के चले गए,पर मैं पुरानी यादों में खो गई।.!
सुमन की शादी रीता से तय हो गई थी।शादी में बस कुछ दिन ही शेष थे एक दिन सुमन रीता से मिलने गए थे, रात होने को आ गई पर सुमन नहीं लौटे। सोचा फिल्म देखने गए होंगे,!
पर तभी फोन आया, सुमन का एक्सीडेंट हो गया है वे सिटी हास्पिटल मे भर्ती हैं
हम भागेभागे पहुंचे।
सुमन की मोटरसाइकिल , कार से टकरा गई थी। सिर में चोट लगी थी पर खतरे से बाहर थे!---
।हास्पिटल मे 15 दिन रहे पर रीता या उसके घर से कोई भी देखने नही आया, ,तो इन्होंने फोन लगाया तब कहीं जाकर सारी बातें पता चलीं।
रीता ने उसी दिन शादी तोड़ने की बात सुमन को बता दी थी, । वो किसी और से एंगेज है, पर घर में कह नही पा रही थी। इस सबका सुमन को बड़ा धक्का लगा। उसी विचार में वे वापस घर आ रहे थे और ये हादसा हो गया।
शरीर के घाव तो भर गए, पर मन के ज़ख्म बहुत गहरे थे । कुछ दिनों बाद सुमन ने बताया उसे जर्मनी की कंपनी में जॉब मिल गयी है और वह जाना चाहते है। हमे भी लगा यहाँ से दूर जाने से मन के घाव ठीक हो जाएंगे।
अब दो ढाई साल बाद सुमन वापिस आ रहा है।
चाचा के आने से सोनू बहुत खुश था एक दिन स्कूल की छुट्टी भी मार ली; पर अब टेस्ट शुरू होने वाले थे।
सुबह स्कूल जाते वक्त जल्दी जल्दी में ये पानी की बोतल ले जाना भूल गए ।मैंने सुमन से कहा जा कर दे आये, बस अभी आती ही होगी । सुमन वापस आ कर बोले \"भाभी, ये सोनू का दोस्त कौन .....\"
मैंने कहा कौन,वह तनु ....\"
\"हां, हां वही बच्चा, मुझे देख लिपट गया और मुझे पापा, पापा.... आप आ गए, कहने लगा। मेरी तो कुछ समझ नही आया ये क्या माजरा है?\" सुमन बोला।
मैं भी कुछ समझ न पायी । फिर जब दोपहर में मैं छाया आंटी के घर गयी, उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि सोनू ने तनु को बताया था, कि फॉरेन से उसके चाचा आने वाले हैं ; तो तनु ने मान लिया की उसके पापा को भी छुट्टी मिल गयी है, शायद वह आप के देवर को पापा समझ बैठा।
\"घर आते समय भी कह रहा था आज उसके पापा आये थे मैं भी तब कुछ समझ नही पायी । पर तुम्हारी बात सुनकर लग रहा है,कि बच्चे के दिमाग में ऐसा ही कुछ विचार आया होगा।\"
\"क्या उसने अपने पापा को या उनकी तस्वीर को देखा है? उसे कैसे पता?\"
\"वो बेटी ..... एक दिन उसकी जिद पर मैने यू ही उसे बोल दिया था, कि तेरे पापा फॉरेन में रहते हैं। छुट्टी मिलने पर आएंगे। बाल मन है ना , कल्पना में तस्वीर बना ली।
मेरी बेटी भी इस बात पर मुझसे बहुत नाराज हुई , पर मैं क्या करती ... क्या बताती उस मासूम को ? उसने मान लिया सबके पापा हैं, तो उसके भी तो होंगे ना?\"
\"आप सुरभि का फिर से विवाह क्यों नही कर देतीं ? मैनें पूछा ।
\"कई बार कहा, पहले तो सुनते ही भड़क जाती थी। पर अब कहती है, माँ एक बच्चे की माँ से कौन शादी करेगा ? .... और सच भी है ना ?\"
रात में हम सब खाना खा रहे थे तब मैंने सारी बात बताई। उस दिन के बाद देवर जी के व्यवहार में परिवर्तन आया।वे सोनू को सुबह स्कूल बस तक छोड़ने और छुट्टी होने पर लेने भी जाने लगे, बिना हमारे कहे ही।
एक दिन ये मुझसे बोले \"सुमन कुछ बदला-बदला सा लग रहा है। मैंने सुबह उसे सुरभि और तनू से बातें करते देखा था।\"
हम दोनो कुछ देर सोचते रहे। अचानक ये बोल पडे़ \"मीनू क्या तुम भी वहीं सोच रही हो जो मुझे लग रहा है?\"
\"हां शायद ,आप देवर जी से बात कीजिए न।\"
\"अरे भाई, ऐसे नाजुक काम तुम अच्छे से कर लोगी, वैसे सुमन ने छुट्टियां भी बढ़ा ली हैं।पता है क्या ?\" ... और वे मन्द,मन्द मुस्कुराने लगे।
एक दिन सोनू ने पूछा, \"मम्मी क्या चाचू ही तनू के पापा हैं ? क्या वे तनू की मम्मी से नाराज़ हैं?\"
बालमन की कल्पनाएं छोटी होने पर भी बहुत जटिल होती हैं। अब मुझे लगा बात काफी गंभीर है। सुरभि और सुमन दोनो चोट खाये हुए हैं । देवर जी से पहले मुझे सुरभि के दिल को टटोलना होगा।
वेलेंटाइन डे नजदीक आ रहा था। वो दिन हमारे लिए और भी खास है, क्योंकि सोनू का वही जन्मदिन भी है।
इस बार उसके चाचा आए हैं, तो हमने घर में उस दिन छोटी-सी पार्टी रखी शाम को।
पार्टी में सोनू के दोस्त ,कुछ हमारे परिचित । सुरभि,तनू और छाया आंटी को आमंत्रित करना था। तो सोनू अपने चाचा के साथ सुरभि के यहां चले गए।

सुबह सुबह इन्होंने मुझे लाल गुलाब का फूल,,? दे कर \"हैप्पी वेलेंटाइन डे\" कहा तभी सुमन मोबाइल लेकर आए और बोले, भैया, एक बार फिर से मैं फोटो लेना चाहता हूं,प्लीज । इन्होंने एक घुटना टेक कर, फिल्मी अंदाज में फूल दे कर \"आय लव यू माय वैलेंटाइन\" कहा। मैंने भी शर्माते हुए फूल ले कर \"लव यू टू\" कहा। सोनू ये सब देख रहा था वो ताली ?बजाते हुए हमारे पास दौड़ के आया हमने उसे भी हैप्पी बर्थडे कहा । फिर ढेर सी टॉफियां ले वह स्कूल चला गया।

उस शाम को सोनू की बर्थडे पार्टी में उसके दोस्त, हमारे मेहमान सब आये। तनु , सुरभि और छाया आंटी भी आए थे।
सुमन, सुरभि के पास खड़े बाते कर रहे थे। इन्होंने मुझे धीरे से इशारा किया। मैं भी मुस्कुरा दी ।
नौ बजे तक पार्टी खत्म हुई, मेहमान चले गए , छाया आंटी भी विदा मांग रही थीं। तनु और सोनु अंदर कमरे में पता नही क्या खुसुर पुसुर कर रहे थे।
तभी तनु सुबह रखे हुए लाल गुलाब के फूल ,?को लेकर दौड़ता आया और देवर जी के पास जा कर बोला, \"पापा, आप भी मम्मी को फूल दे कर \"लव यू\" कह दीजिये न।
उसकी इस बात पर एक पल को सभी विस्मित हो गए!! सुमन ने हम दोनों के तरफ देखा, मानो स्वीकृति चाहते हों ।
हमने मुस्कुरा कर हाँ कहा तो उन्होंने फूल लेकर सुरभि की तरफ बढ़ाया। सुरभि ने छाया आंटी की तरफ देखा, तो वे भी मुस्कुरा दीं ।
तभी तनु भी बोल पड़ा \"मम्मी फूल ले लो न प्लीज , तभी पापा घर आएंगे, पापा, मेरे वैलेंटाइन पापा\"
और ......
सुरभि ने फूल ले लिया।?

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लेखिका : श्रीमती प्रतिभा परांजपे
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