Dec 06, 2021
Poem

एक सफर मुकम्मल हो रहा है

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एक सफर मुकम्मल हो रहा है

❤️ ईरा दिवाळी अंक 2021 ❤️

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आज एक सफर मुकम्मल होने को है
जिंदगीको हमेशासेही
सफर माना था,
हमसफर मिलेंगे यहा,
अंदाजा इसका भी था,
फिर क्यु,अंदर ही अंदर कुच आज टुट रहा है,
आज एक सफर मुकम्मल हो रहा है...
मुकम्मल होते सफरकी
कुच यादे ताजा होगयी.
जो मांगीथी दुवा मैने तेरे जैसे दोस्तकी,
वो उसदीन कुबुल हुयी.
रेलकी पटरीया उस दीन भी खडखडायी थी,
दोस्ती अपनी जिस दीन
इसी सफर का पैगाम लायी थी...
खुबसुरत सफर ये,
यादे बना रहा था..
मै फिरसे जीउठी थी और यहा...,
एक सफर मुकम्मल होरहा था.
किसने सोचा था के
दोस्तीकी राहे इतनी जल्दी जुदा होजायेंगी,
जीउठने वाली दोस्ती,
एक दीन युही पराई होजायेगी...
हमारा मकाम कितना जल्दी आगया ऎ मेरे दोस्त,
युही नही वोही रेल की पटरीया,
कल फिरसे खडखडायी थी...
लगाथा जैसे कोई, और पास आरहा है.
क्या पता था, कोई अपना सफर मुकम्मल कर रहा है...
-गायत्री-

❤️ ईरा दिवाळी अंक 2021 ❤️

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Gayatri

Engineer

Hello, I'm Gayatri. Full time engineer and part time writer. I write my own imagination. I try to write normal things which can happen with any of us. Characters I pick are from around us, they are one of us. I think stories are the media to connect with all nice thoughts and so I like to connect with people through my writing.