Nov 30, 2021
सामाजिक

आत्मा का ऋण

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आत्मा का ऋण

❤️ ईरा दिवाळी अंक 2021 ❤️

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"डू" और "डोण्ट" की ऐसी लंबी लिस्ट में
असली ज़िंदगी जैसे खो जाती है,
एक ही बार मिलनेवाली ज़िंदगी भी
समाज के खोखले उसूलों पर बली चढ़ जाती है!

कुछ भी जब जलता है तो गंध आती है,
पर दिल और भावनाएँ लापतासी भस्म होती है
न साथी, न हमसफर, दिल को समझ पातें
औरों को खुश रखने में ज़िंदगी बीत जाती है!

डर -सा 'अज्ञात' एक मन में है-
क्या हो तब  जो किसी दिन साँस रुक जाए?
जीवन के अंतिम पलों में जो कभी
आत्मा मुझसे जीने का हिसाब पूछे ?

गर आत्मा पूछे-  बताओ,  ईमानदारीसे,
किस क्षण बोलो तुमने मेरी आवाज़ सुनी?
अनुत्तरित  प्रश्न  छाए चेहरेपर और
अपरिचित - सी अनकही बेचैनी!

आत्म तृप्ति, आत्मानंद, और भावनाओं का बोझ
कितना ऋण? सारा उधार. . . पर क्याें
अगले जनम में चुकाने को. . ?
क्या यही आत्मा, फिरसे यही ज़िंदगी दोहरायेगी?

©®सौ. स्वाती बालूरकर देशपांडे , सखी
दिनांक - १८.०१. २०२१

 

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Swati Balurkar, Sakhi

Hindi teacher in CBSE school

I swati Balurkar, working as Hindi teacher in CBSE school in Aurangabad at present. Having 24 years of experience in teaching. worked 23 years in Hyderabad . 1990-1994 I wrote many stories n poems and got published. After break started writing in July 2018 again. I am published writer on PRATILIPI MARATHI and STORYMORROR.